WHAT IS YOUR BAD EXPERIENCE IN LAST 4 MONTHS DUE TO COVID-19 Write yours details information about bad effects in your life due to carona virus .

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WHAT IS YOUR BAD EXPERIENCE IN LAST 4 MONTHS DUE TO COVID-19

Write yours details information about bad effects in your life due to carona virus .
  1. Your Name
  2. Mobile number
  3. City
  4. Write your Experience that what are the bad effects in your life due to carona virus.
Write in Hindi or English.
False color transmission electron microscope, Image of carona virus


SymptomsFever, cough, fatigue, shortness of breath, loss of smell; sometimes no symptoms at all
ComplicationsPneumonia, viral sepsis,  respiratory distress

लॉकडाउन में लोगों का डिजिटल एक्सपोजर बढ़ा है। कंप्यूटर-मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स, वेब सीरीज, मूवी, टीवी शो, ई-स्पोर्ट्स आदि में लोग खासा समय लगा रहे हैं। नतीजा रहा कि छात्रों व युवाओं में मोबाइल-इंटरनेट एडिक्शन बढ़ा है। ऐसे मरीज 4 गुना तक बढ़ गए हैं।
मुंबई, दिल्ली, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू जैसे बड़े शहरों के अलावा औरंगाबाद, आगरा, मेहसाणा, सिक्किम और मध्य प्रदेश, राजस्थान व हरियाणा के छोटे शहरों में भी मरीज बढ़ रहे हैं। यह बात केंद्र सरकार के दो शीर्ष एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर के आकलन में सामने आई है। पहले 10वीं या इससे बड़ी क्लास के छात्रों में ये लत ज्यादा थीं, अब 8वीं या इससे छोटी क्लास के बच्चे एडिक्ट होने लगे हैं।
पॉर्न कंटेंट देखने की लत भी बढ़ी
22-35 वर्ष के युवाओं में तो अश्लील कंटेंट देखने की लत भी बढ़ गई। ब्रिंज वॉचिंग यानी 120 मिनट से अधिक लगातार टीवी देखना बढ़ा है। डिजिटल बर्न आउट (थकान), डूम सर्फिंग (कोरोना सर्चिंग) जैसी समस्याएं भी आ रही हैं।
बेंगलुरू के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (निम्हांस) परिसर के शट (सर्विसेस फॉर हेल्दी यूज ऑफ टेक्नोलॉजी) क्लिनिक में वर्ष 2014 से कार्य कर रहे क्लीनिक प्रमुख और प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार कहते हैं कि लॉकडाउन के पहले रोज 1-2 मरीज आते थे। अब 3-4 मरीज संपर्क कर रहे हैं।
वहीं, दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) के बिहेवियरल एडिक्शन्स क्लीनिक के कंसल्टेंट इंचार्ज डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा कहते हैं कि पहले हम रोज 2-3 ऐसे मरीज देखते थे, अब यह आंकड़ा 10 से 12 हो गया।
हाल ही में कॉलेज छात्रों पर कराए हमारे एक सर्वे में 51% छात्रों ने माना कि लॉकडाउन के बाद से उनकी गेमिंग हैबिट बढ़ी हैं। छात्र सुबह आठ से दोपहर तक लैपटॉप या मोबाइल पर होते हैं। इतने समय वे पढ़ाई ही कर रहे हैं, जरूरी नहीं।
बल्हारा कहते हैं कि महिलाएं भी सोशल मीडिया और वेब सीरीज या मूवी के लिए अधिक समय स्क्रीन पर बिताती हैं। 40 से अधिक उम्र के वयस्क पुरुष गेम, पोर्न और वेब सीरीज अधिक देख रहे हैं। लोग मोबाइल-कंप्यूटर पर ज्यादा वक्त तक एक्टिव रहते हैं।
3 बातों से समझें- आप डिजिटल एडिक्शन के शिकार तो नहीं हो रहे
  • लगातार तलब लगी रहे।
  • एक बार प्रयोग के बाद फिर आपके रुकने में समस्या आए और फिर आप मोबाइल उठा लें।
  • पता होते हुए भी कि जीवन प्रभावित हो रहा है, खेलने, सोने, खाने या कहीं आने-जाने में देरी हो रही फिर भी मोबाइल या स्क्रीन न छोड़ पाएं।
सावधानी:
  • 30 मिनट से ज्यादा न हो स्क्रीन एक्सपोजर।
  • एक बार में 30 मिनट से अधिक स्क्रीन पर न रहें।
  • अगर ज्यादा देर तक रहना है, तो हर 30 मिनट बाद 10 बार पलकें झपकाएं।
  • 10 बार सिर को लेफ्ट-राइट और अप-डाउन करें। कलाइयों को क्लॉक वाइस और एंटी क्लॉक वाइस घुमाए




22-35 वर्ष के युवाओं में तो अश्लील कंटेंट देखने की लत भी बढ़ गई। ब्रिंज वॉचिंग यानी 120 मिनट से अधिक लगातार टीवी देखना बढ़ा है। (प्रतीकात्मक फोटो)




देश में कोरोनावायरस के मामले 15 लाख के पार हो गए हैं। एक्टिव केसेस की संख्या भी 5 लाख के ऊपर हो गई है। हालांकि, राहत वाली बात ये है कि हमारे यहां कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिंता जताई जा रही है कि आने वाले समय में देश में संक्रमण की रफ्तार और तेज होगी।
ऐसे में सवाल यही है कि आखिर सारे उपाय आजमाने के बाद भी कोरोना पर काबू पाना मुश्किल क्यों हो रहा है? इसके 5 संभावित कारण ये हो सकते हैं...
1. पॉपुलेशन डेंसिटीः हर 1 किमी के दायरे में 450 से ज्यादा लोग
देश की आबादी है 137 करोड़ से भी ज्यादा। सबसे ज्यादा आबादी के मामले में हम चीन के बाद दूसरे नंबर पर हैं। लेकिन, पॉपुलेशन डेंसिटी के मामले में हम चीन और पाकिस्तान से भी आगे हैं। वर्ल्ड बैंक के आंकड़े बताते हैं कि हमारे देश में हर 1 किमी के दायरे में 455 लोग रहते हैं। जबकि, चीन में ये आंकड़ा 148 और पाकिस्तान में 275 का है।
खतरा क्यों : एक कोरोना संक्रमित महीनेभर में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है।



2. परिवार: देश में हर घर में औसतन 4 लोग से ज्यादा रहते हैं
2011 की जनगणना के मुताबिक, देश में 70% से ज्यादा परिवार ऐसे हैं, जहां 4 से ज्यादा लोग रहते हैं। जबकि, एनएसएसओ का सर्वे बताता है कि देश में हर घर में औसतन 4.3 लोग रहते हैं। शहरी इलाकों में यही औसत 3.9 का है और ग्रामीण इलाकों में 4.5 का। यूपी-बिहार जैसे राज्यों में तो ये औसत 5 से ज्यादा का है।
इतना ही नहीं, ज्यादातर भारतीय परिवारों में तीन से चार पीढ़ियां तक साथ-साथ रहती हैं।
खतरा क्यों : अगर एक भी व्यक्ति संक्रमित हुआ, तो पूरा परिवार संक्रमित हो सकता है।




3. पानी की सुविधाः 48.3% परिवारों के पास पीने के पानी की सुविधा नहीं
कोरोनावायरस से बचने के लिए अभी सबसे ज्यादा जिस बात पर जोर दिया जा रहा है, वो है बार-बार हाथ धोना। डब्ल्यूएचओ और सरकार की तरफ से यही कहा जा रहा है कि कोरोना से बचने के लिए दिन में कम से कम 20 सेकंड तक 10 बार हाथ जरूर धोएं।
अगर दिनभर में 20 सेकंड तक 10 बार हाथ धोएं, तो हर बार हाथ धोने के लिए 2 लीटर पानी चाहिए। मतलब दिनभर में 20 लीटर। इस तरह 4 लोगों के एक परिवार को दिन में 10 बार हाथ धोने के लिए 80 लीटर पानी चाहिए। लेकिन, सच तो ये है कि देश के 48% से ज्यादा परिवारों के पास पीने के पानी की सुविधा नहीं है, तो हाथ धोने के लिए पानी कहां से लाएंगे?
नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस यानी एनएसएसओ के 2018 में हुए सर्वे में सामने आया था कि देशभर में 51.7% परिवारों तक ही पीने के पानी की सीधी पहुंच है। यानी, इन परिवारों के घरों तक पानी आ रहा है। इस हिसाब से 48.3% परिवारों के पास घर तक पानी ही नहीं आता। इसका मतलब यही हुआ कि इन्हें पानी के लिए ट्यूबवेल, हैंडपंप, कुएं, वॉटर टैंकर के भरोसे रहना पड़ता है।
खतरा क्यों : हैंडपंप, कुएं में पानी भरते समय सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा जाता।



4. शौचालयः 20% से ज्यादा परिवारों के पास शौचालय की कोई सुविधा नहीं
हमारे देश में न सिर्फ पानी की, बल्कि शौचालयों की भी कमी है। एनएसएसओ का सर्वे बताता है कि देश में 20.2% परिवार ऐसे हैं, जिनके पास शौचालय की कोई सुविधा ही नहीं है। यानी एक तरह से ऐसे लोग आज भी खुले में ही शौच करने को मजबूर हैं।
एनएसएसओ के मुताबिक, 68.1% परिवारों तक ही शौचालय की पहुंच है। यानी इन परिवारों में घर में ही शौचालय है। जबकि, 11.2% परिवार पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
खतरा क्यों : चीन की एक रिसर्च बताती है कि शौच के जरिए भी वायरस हवा में फैल सकता है।



5. हाथ धोने की आदतः 36% परिवारों में लोग खाने से पहले साबुन या डिटर्जेंट से हाथ धोते हैं
एनएसएसओ के सर्वे के मुताबिक, देश के सिर्फ 35.8% परिवार ही ऐसे हैं, जहां खाना खाने से पहले हाथ धोने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल होता है। जबकि, 60.4% परिवार ऐसे हैं, जहां खाने से पहले सिर्फ पानी से ही हाथ धो लिए जाते हैं।
इसी तरह से 74% से कुछ ज्यादा ही परिवार ऐसे हैं, जहां शौच के बाद साबुन या डिटर्जेंट से हाथ धोए जाते हैं। आज भी 13% से ज्यादा परिवारों में शौच के बाद सिर्फ पानी से ही हाथ धुलते हैं।
खतरा क्यों : रिसर्च कहती है कि साबुन से हाथ धोकर संक्रमण का खतरा 90% तक कम हो सकता है।










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